Temple Saree – साउथ की ये साड़ी टेंपल साड़ी के नाम से क्यों है मशहूर 

Temple Saree – साउथ की ये साड़ी टेंपल साड़ी के नाम से क्यों है मशहूर
image source : images.herzindagi.info

भारतीय संस्कृति अपने तीज त्यौहार, वस्त्रों, पकवानों एवं भाषिक विविधताओं को लेकर विश्वभर में विख्यात है। यहाँ की संस्कृति इतनी विस्तृत है कि यहाँ आपको पग – पग पर कुछ नया और अनूठा देखने को मिलेगा। यहाँ के तीज – त्यौहारों में जितने रंग हैं उतने ही रंग आपको यहाँ के अलग – अलग परिधानों में भी देखने को मिलेंगे। केवल रंग ही नही इन परिधानों के प्रकार, इनका खास स्टाइल और इन्हे पहनने के बाद आपका बेहतरीन लुक आपके दिल को खूब भाएगा। इन तमाम परिधानों के नाम भी बहुत खास होते हैं इसलिए आज हम आपके साथ टेंपल साड़ी के बारे में बात करने वाले हैं। 

अगर हम भारतीय महिलाओं के पहनावे के बारे में बात करें तो उन्हे साड़ी पहनना बहुत पसंद होता है। साड़ी पहनने के बाद काफी एलिगेंट लुक आता है। भारत में साड़ी की बहुत सारी वेरायटीज उपलब्ध हैं। लेकिन आज हम आपको तमिलनाडू की फेमस कोनराड साड़ी के बारे में बताने वाले हैं। 

इस साड़ी को टेंपल साड़ी भी कहा जाता है। इस साड़ी को ज्यादातर तमिलनाडु के पूर्वी हिस्सों अर्नी, कांचीपुरम, कुंभकोणम, रासीपुरम, सलेम, तंजावुर और तिरुभुवनम जैसे इलाकों में बुना जाता है। 

इस साड़ी की सबसे खास बात यह है कि इसे हाथ से बुना जाता है। अन्य साड़ियों की तुलना में इसकी बुनाई काफी कठिन होती है। इस साड़ी की विशेषता यह है कि इसमें प्राकृतिक तत्वों, जीवों और वनस्पतियों से प्रेरित विशेष डिजाइन होते हैं। इस साड़ी के बॉर्डर पर मौजूद विशेष डिजाइंस के कारण इसे पेट्टू या कांपी कहा जाता है, जो साड़ी के किनारे के पास लगभग 3 सेंटीमीटर स्थित होता है। 

इस साड़ी में साउथ के लोकप्रिय मंदिरों को भी रूपांकित किया जाता है इसलिए इस साड़ी को टेंपल या मुबहम साड़ी भी कहा जाता है।

टेंपल साड़ी की विशेषताएं

पारंपरिक तौर पर हाथ से बुनी जाने वाली कोनराड साड़ी के घेर में चेक या धारीदार पैटर्न होते हैं। साड़ी के पल्लू के अंत में गोल्‍डन थ्रेड की कढ़ाई का काम या चौड़ी जरी की धारियां होती हैं।

आज के समय में इस साड़ी के नए डिजाइनर वर्जन में जरी का काम हटा दिया गया है और साड़ी को थोड़ा लंबा बनाया गया है। 

इस तरह की साड़ी में ग्रे, काला, भूरा और ऑफ-व्हाइट कलर आपको खूब देखने को मिलेगा। 

इसमें आपको मंदिर आदि के मोटिफ के साथ ही जानवरों और प्राकृतिक चीजों के भी मोटिफ देखने को मिलेंगे, जिन्हें कोरवई कहा जाता है। 

डिस्क्लेमर – यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह लेना ही उचित है। Ultranewstv इस जानकारी की पुष्टि नही करता और ना ही इसकी ज़िम्मेदारी लेता है। 

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