बुलुसु सांबमूर्ति (4 मार्च 1886 – 2 फरवरी 1958) एक भारतीय वकील, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 1937 से 1942 तक मद्रास विधान परिषद के अध्यक्ष रहे। सांबमूर्ति आंध्र आंदोलन के समर्थक थे, जो एक अलग तेलुगु-भाषी राज्य की स्थापना के लिए प्रयासरत था। उन्हें “महर्षि बुलुसु सांबमूर्ति” के सम्मानित उपाधि से भी जाना जाता है।
प्रारंभिक जीवन
सांबमूर्ति का जन्म 4 मार्च 1886 को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के दुल्ला गाँव में एक वैदिक विद्वान परिवार में हुआ था। उन्होंने महाराजा कॉलेज, विजयनगरम से भौतिकी में स्नातक किया और कुछ समय तक व्याख्याता के रूप में कार्य किया। बाद में, उन्होंने कानून की डिग्री प्राप्त की और 1911 में काकीनाडा में वकालत शुरू की, जहाँ वे एक प्रमुख आपराधिक वकील के रूप में प्रसिद्ध हुए।
बुलुसु सांबमूर्ति जीवनी – Bulusu Sambamurthy Biography
जन्म | 4 मार्च 1886दुल्ला, पूर्वी गोदावरी जिला , आंध्र प्रदेश , भारत |
मृत | 2 फरवरी 1958 (आयु 71)काकीनाडा , आंध्र प्रदेश, भारत |
राजनीतिक दल | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
पेशा | राजनीतिज्ञ, वकील |
राजनीतिक करियर
1919 में, महात्मा गांधी के आह्वान पर, सांबमूर्ति ने अपनी कानूनी प्रैक्टिस छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन में भाग लिया और पूर्ण स्वराज की मांग करने वाले पहले नेताओं में से एक थे। 1930 में, उन्होंने काकीनाडा के निकट चोलंगी में नमक सत्याग्रह में भाग लिया और गिरफ्तार होकर वेल्लोर सेंट्रल जेल में कैद रहे। 1937 के मद्रास प्रेसीडेंसी विधान सभा चुनाव में, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में चुने गए और मद्रास विधान परिषद के अध्यक्ष बने। 1942 में, उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
आंध्र आंदोलन
सांबमूर्ति आंध्र आंदोलन के प्रबल समर्थक थे, जो एक अलग तेलुगु प्रांत की स्थापना के लिए समर्पित था। 1952 में, जब पोट्टी श्रीरामलु ने आंध्र प्रदेश के गठन के लिए आमरण अनशन किया, सांबमूर्ति ने उन्हें अपने निवास पर आमंत्रित किया, जिससे उनके समर्पण का पता चलता है।
मृत्यु और विरासत
2 फरवरी 1958 को काकीनाडा में सांबमूर्ति का निधन हो गया। उनकी स्मृति में, 2008 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। काकीनाडा में एक सड़क का नामकरण “सांबमूर्ति नगर” उनके सम्मान में किया गया है।
बुलुसु सांबमूर्ति का जीवन त्याग, समर्पण और देशभक्ति का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।