दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल और उनके पॉलिटिकल स्टार्टअप आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. एक दशक तक राजधानी में राज करने के बाद केजरीवाल की पार्टी बीजेपी से चुनाव हार गई. पार्टी के 22 विधायक विपक्ष के रूप में दिल्ली विधानसभा में पहुंचे हैं, जबकि पूर्व सीएम आतिशी अब विपक्ष की नेता हैं।
कहां गायब हैं केजरीवाल?
सबसे बड़ा सवाल अभी भी घूम रहा है कि अरविंद केजरीवाल कहां हैं? वे आखिरी बार AAP विधायक दल की मीटिंग में नजर आए थे, जहां आतिशी को विपक्ष का नेता घोषित किया गया था।
पार्टी के टॉप सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयारी कर रहे हैं, जहां उनकी पार्टी की जड़ें मज़बूत हैं। पंजाब में AAP के पास सत्ता में बचा एकमात्र राज्य है। इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ कई अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने का विचार अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, क्योंकि आम आदमी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सकती है।
फिलहाल, आम आदमी पार्टी का फोकस लुधियाना पश्चिम विधानसभा उपचुनाव जीतना और उसके बाद 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी करना है। केजरीवाल की दिनचर्या पंजाब में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी नेताओं के साथ नियमित बैठक करने की है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अरविंद केजरीवाल राज्य में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी ले रहे हैं।
दिल्ली में मीटिंग, सिसोदिया का पंजाब दौरा
हाल ही में केजरीवाल के आवास पर पंजाब यूनिट के नेताओं और दिल्ली यूनिट के प्रभारी के साथ कई बैठकें हुईं।दिल्ली की हार से सबक लेते हुए AAP का फोकस अब संगठनात्मक मजबूती और शासन मॉडल पर है। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया पंजाब का दौरा कर रहे हैं। हाल ही में पंजाब के स्कूलों के उनके दौरे ने विवाद खड़ा कर दिया है।
पंजाब सरकार AAP के दिल्ली मॉडल के आधार पर राज्य के सरकारी स्कूलों और पूरे शिक्षा क्षेत्र में सुधार को गति देगी और इसमें मनीष सिसोदिया के विजन की छाप होगी।
ड्रग्स और भ्रष्टाचार पर सख्त पंजाब सरकार
हाल ही में पंजाब सरकार ने ड्रग्स और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करने का ऐलान किया है। पंजाब पुलिस ने ड्रग माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर तक का इस्तेमाल किया। पंजाब में नौकरशाही में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सूबे में पार्टी के लिए अंदरूनी व्यवस्था का बिगड़ना नेतृत्व के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है।