हरिहरन – Hariharan

हरिहरन - Hariharan

हरिहरन एक विश्व-प्रसिद्ध भारतीय गायक हैं, जिन्होने 10 भाषाओं में रिकॉर्ड 15,000 गाने गए हैं। भारतीय शास्त्रीय गायन व फ्यूज़न संगीत उनकी विशेषता है। संगीत के क्षेत्र में उनके द्वारा दिए गए योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2004 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। हरिहरन के द्वारा गाया गया ‘श्री हनुमान चालीसा’ को ने यूट्यूब पर 4 बिलियन से अधिक व्यूज मिले हैं।

हरिहरन के द्वारा गाया गया ‘श्री हनुमान चालीसा’ को ने यूट्यूब पर 4 बिलियन से अधिक व्यूज मिले हैं।

हरिहरन का जन्म 3 अप्रैल, 1955 को शास्त्रीय संगीतकार एच. ए. एस. मणि और अलामेलु मणि के घर हुआ था। उनका पूरा नाम हरिहरन अनंत सुब्रमणि है। हरिहरन जब केवल 7 वर्ष के थे, तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उनके पिता, एच. ए. एस. मणि, जिन्हें प्यार से चेल्लामणि कहा जाता था, एक प्रसिद्ध संगीतकार थे। उन्होंने ने मुंबई में कई कर्नाटक गायकों को तैयार किया, जहां 1963 में कार्डियक अरेस्ट के कारण 40 के दशक की शुरुआत में उनकी मृत्यु हो गई। 

अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, हरिहरन ने कानून और विज्ञान में भी डिग्री हासिल की। उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उनकी माता से प्राप्त हुई। पहली गुरु यानि उनकी माँ ने उन्हें कर्नाटक संगीत से परिचित करवाया। हरिहरन की माँ, अलामेलु मणि का कर्नाटक गायन में लंबा करियर रहा है। हरिहरन ने उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से हिंदुस्तानी गायन में प्रशिक्षण लिया और ग़ज़ल गाने की कला में महारत हासिल की।

उन्होंने कई ग़ज़ल एल्बम जारी किए जिनमें ग़ज़ल का मौसम, आबशार-ए-ग़ज़ल, गुलफ़ाम, आदि प्रमुख हैं। ये सभी एल्बम बेहद लोकप्रिय हुए। गुलफ़ाम एल्बम के लिए उन्हें 1994 में वर्ष के सर्वश्रेष्ठ एल्बम के लिए डीवा पुरस्कार मिला। बॉलीवुड में उनका सफर हिन्दी फिल्म गमन (1978) के लिए गाने ‘अजीब सानेहा’ से शुरू हुआ।

अपने पूरे करियर के दौरान हरिहरन ने 10 भाषाओं में रिकॉर्ड 15,000 गाने गाए। हरिहरन ने हिंदी के अलावा तमिल, मलयालम, तेलुगु, भोजपुरी, कन्नड़, मराठी, सिंहली, भोजपुरी, उड़िया, बंगाली, संस्कृत, गुजराती और अंग्रेजी, आदि में भी गाने गाए हैं। उन्होंने 1998 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार : “मेरे दुश्मन” (हिंदी), बॉर्डर के लिए, और वर्ष 2009 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार : “जीव दंगला गुंगला रंगला” (मराठी), जोगवा के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। संगीत के क्षेत्र में उनके द्वारा दिए गए योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2004 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

हरिहरन के प्रसिद्ध गाने

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